जहाँ तक हमारी नज़र जा रही है
तबाही तबाही नज़र आ रही है
उसे उस के जैसा कोई मिल गया है
हमें याद कर के वो पछता रही है
मुझे और जीने की ख़्वाहिश नहीं है
मगर ज़िंदगी है कि बहला रही है
नहीं है कोई मेरे जैसा कोई भी
अकेले में ख़ुद को ये बतला रही है
नहीं है मोहब्बत किसी को किसी से
जवानी जवानी को उलझा रही है
— Chandan Sharma















