तेरे बा'द भी आईं और गईं कितनी ही हसीनाएँ जानमैं ने लेकिन हिज्र के ग़म का वो भौकाल बनाए रक्खातेरे लौट आने का इस दिल को अरसों तक वहम रहा दोस्तसो बरसों मैं ने भी अपनी दाढ़ी बाल बनाए रक्खा— Chandan Sharma