"मौजूदगी"
तेरी मौजूदगी तब्दील करती है
मेरे सारे ग़मों को शादमानी में
कोई भी बात हो उस को कहानी में
कोई मुश्किल हो तो आसान होती है
तेरे होने से मुझ में जान होती है
निगाहें मुस्कुराती है तुझे पा कर
ज़हाँ को भूल जाती है तुझे पा कर
रोने के बदले तेरे साथ हँसता हूँ
हँसा के तुझ को आगे साथ हँसता हूँ
ये हैरत है कि मैं बेबाक होता हूँ
ख़ुशी में आप की मैं पाक होता हूँ
सुनो सौ बात की इक बात ऐसा है
तुम्हारी मौजूदगी तब्दील करती है
मेरे इस मौत को इक ज़िंदगी में जाँन
— Chandan Sharma















