कर इरादे बयाँ जान दिल खोल कर
क्यूँ गई दूर तू अलविदा बोल कर
और जुदाई में तुम मुझ से झगड़ी नहीं
मुझ से नफ़रत भी तुम ने किया तोल कर
मुझ को अब हक़ नहीं मैं तुझे कुछ कहूँ
आदतन बातें होंगी ज़रा गोल कर
— Chandan Sharma
क्यूँ गई दूर तू अलविदा बोल कर
और जुदाई में तुम मुझ से झगड़ी नहीं
मुझ से नफ़रत भी तुम ने किया तोल कर
मुझ को अब हक़ नहीं मैं तुझे कुछ कहूँ
आदतन बातें होंगी ज़रा गोल कर
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