
महीनों तक रहा करते थे सब मेहमान आँखों में,
मगर अब ख़्वाब भी आते नहीं वीरान आँखों में
ज़मान ए हिज्र कहने को रिवाज़ ए इश्क़ ही तो है,
मगर क्या क्या नहीं होता है इस दौरान आँखों में
— Darpan
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