Naeem Sarmad

Naeem Sarmad

@naeem-sarmad

Naeem Sarmad shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Naeem Sarmad's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

कैसी बिपता पाल रखी है क़ुर्बत की और दूरी की ख़ुशबू मार रही है मुझ को अपनी ही कस्तूरी की — Naeem Sarmad
अब की सर्दी में कहाँ है वो अलाव सीना अब की सर्दी में मुझे ख़ुद को जलाना होगा — Naeem Sarmad

Ghazal

काफ़ से नून तलक शोर मचा वहशत है या'नी इस अहद में जो कुछ भी हुआ वहशत है ला-मकानी में मकाँ होश-ओ-ख़िरद के नहीं हैं यूँँ समझ ले कि ख़लाओं का ख़ुदा वहशत है वो जो इक बात है जो तुझ को बताई न गई वो जो इक राज़ है जो खुल न सका वहशत है अब मिरा अक्स किसी तौर नहीं टूटेगा मेरे दरवेश के होंठों की दुआ वहशत है मेरे मौला से अक़ीदत की जज़ा है जन्नत मेरे मौला से मोहब्बत की जज़ा है वहशत है मेरे बालों में भी मिट्टी है तिरे कूचे की मेरे दामन से भी राज़ी-बा-रज़ा वहशत है नक़्ल करता है मेरी होश में आ दीवाने मेरे अंदाज़ चुराने को सज़ा वहशत है — Naeem Sarmad
तुम्हारे चेहरे पे ध्यान ऐसे टिका हुआ है तमाम सम्तों को एक जानिब रखा हुआ है हरे दरख़्तों से बेलें कैसे लिपट रही हैं ज़मीन पर आसमान कैसे झुका हुआ है वो एक लड़की जो मर रही है हया के मारे वो एक लड़का जो देखने पर तुला हुआ है शब-ए-विसाल उस का सुर्ख़ आँचल मुसल्ला कर के बदन-वज़ीफ़े का विर्द जारी रखा हुआ है तू सिर्फ़ वहशत के दम पे दिल-दश्त में ना आना ये इस्म भी राएगाँ है मेरा पढ़ा हुआ है फिर उस के बा'द उस ने मेरी आँखें भी गीली कर दीं मैं पूछ बैठा था तेरी आँखों को क्या हुआ है ये वक़्त-ए-मग़रिब से क़ब्ल का आफ़्ताब 'सरमद' ये उस के हाथों में कैसे कैसे लगा हुआ है — Naeem Sarmad
सुर्ख़ मिट्टी को हवाओं में उड़ाते हुए हम अपनी आमद के लिए दश्त सजाते हुए हम तुझ तबस्सुम की मोहब्बत में हुए हैं बर्बाद मुस्कुराएँगे तिरा सोग मनाते हुए हम ला-मकानी में हमें छोड़ के जाता हुआ तू दश्त-ए-इम्काँ से तुझे ढूँड के लाते हुए हम ऐ ख़ुदा तू ही बता कैसे करेंगे इनकार आलम-ए-हू में तुझे हाथ लगाते हुए हम रक़्स करते हैं तो मिट्टी तो उड़ेगी प्यारे उन को लगते हैं करामात दिखाते हुए हम अपने होने से भी इनकार किए जाते हैं तेरे होने का यक़ीं ख़ुद को दिलाते हुए हम अब ऐ वहशत में गुँधी ख़ाक रखी चाक पे और अपने होने के लिए चाक घुमाते हुए हम हालत-ए-वज्द के हालात बता बात हो तो हालत-ए-हाल में तफ़रीह उठाते हुए हम ख़ामुशी शोर हैं और शोर बला का 'सरमद' तुम ने देखे हैं कहीं शोर मचाते हुए हम — Naeem Sarmad
ये पैरहन पे पैरहन वबाल है सो ख़ुद को बे-वबाल कर विसाल कर वजूद-ए-जिस्म-ओ-जाँ से इस्तिफ़ादा कर ज़रा समय निकाल कर विसाल कर लहू को चुल्लुओं में ले के यूँँ उड़ा बदन पे रंग डाल कर विसाल कर अमीर-ए-वहशियान-ए-इश्क़ हूँ सो तू ज़रा सी देख-भाल कर विसाल कर ये इस्म-ए-कारसाज़ है जुनून पढ़ ये होश पाएमाल कर विसाल कर तिरी ये ज़र्द आँखें देख शर्म कर तू इन का रंग लाल कर विसाल कर ख़ुदा जवाब दे न दे बिगड़ पड़े ख़ुदा से भी सवाल कर विसाल कर विसाल-ए-यार गर हराम है तो सुन हराम को हलाल कर विसाल कर ख़ुदा का हिज्र अस्ल में विसाल है सो इस में इंतिक़ाल कर विसाल कर फ़िराक़ से गुरेज़ कर गुरेज़ कर विसाल कर विसाल कर विसाल कर — Naeem Sarmad
का'बा काशी, गंगा जमना, कूचा और बाज़ार सखी उस के दो नैनों के आगे सब कुछ है बेकार सखी उस का माथा हिम पर्बत सा ऊँचा और चमकीला है और उस के कोमल अधरों से बहती है रसधार सखी उस की ज़ुल्फ़ें काली शब हैं, शाने उगते सूरज से और ये रातें चूम रही हैं दिन को बारम्बार सखी श्वेत हिरन के जैसे मेरे पोरे और उस का सीना शब के जंगल छान रहे हैं पाँचों पक्के यार सखी इक यूसुफ़ है जिस की ख़ातिर उँगलियाँ काटे बैठी हूँ एक मसीहा के चक्कर में हो गई हूँ बीमार सखी हम दोनों के यार सखी री सब के सब अलबेले हैं मैं लैला की पक्की सहेली वो मजनू के यार सखी — Naeem Sarmad