mujh men meri zaat bhi rakkhi hui hai dost | मुझ में मेरी ज़ात भी रक्खी हुई है दोस्त

  - Naeem Sarmad

मुझ में मेरी ज़ात भी रक्खी हुई है दोस्त
छोड़ ये बात तो और भी उलझी हुई है दोस्त

हम लोगों को पानी अच्छा लगता है
हम लोगों ने मिट्टी पहनी हुई है दोस्त

कितना सज-धज कर महफ़िल में आया हूँ
मेरी वहशत घर पर रक्खी हुई है दोस्त

इस तस्वीर का लहजा देख रहा है तू
ये तस्वीर भी मुझ से रूठी हुई दोस्त

वो लड़की जो सब से ज़ियादा हँस रही है
उस की आँखें देख वो रोई हुई है दोस्त

जिस बक्से में तेरे सूट रखे हैं ना
उस में मेरी जींस भी रक्खी हुई है दोस्त

  - Naeem Sarmad

Paani Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Naeem Sarmad

As you were reading Shayari by Naeem Sarmad

Similar Writers

our suggestion based on Naeem Sarmad

Similar Moods

As you were reading Paani Shayari Shayari