हमीं को क़ातिल कहेगी दुनिया हमारा ही क़त्ल-ए-आम होगाहमीं कुएँ खोदते फिरेंगे हमीं पे पानी हराम होगाअगर यही ज़ेहनियत रही तो मुझे ये डर है कि इस सदी मेंन कोई अब्दुल हमीद होगा न कोई अब्दुल कलाम होगा— Meraj Faizabadi