KHud ko murshid maan le pyaare kyun aur kya ka bhed samajh | ख़ुद को मुर्शिद मान ले प्यारे क्यूँँ और क्या का भेद समझ

  - Naeem Sarmad

ख़ुद को मुर्शिद मान ले प्यारे क्यूँँ और क्या का भेद समझ
अपनी सूरत तकता रह और फिर कैसा का भेद समझ

तुझ से बढ़ कर दश्त नहीं है तुझ से बढ़ कर गोर नहीं
इस जंगल में आ उस गोर में रह मौला का भेद समझ

जानने वाले मानने वालों से अफ़ज़ल है ध्यान रहे
मजनूँ मत बन होश में रह और फिर लैला का भेद समझ

पानी सर से ऊपर चढ़ने दे साँसों की माला फिर
दो जान होता मैं बैठ और दिल दरिया का भेद समझ

हर इक़रार से पहले इक इंकार की हिफ़ाज़त होती है
अल्लाह के बंदे अल्लाह से पहले ला का भेद समझ

  - Naeem Sarmad

Dariya Shayari

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