ye pairhan pe pairhan vabaal hai | ये पैरहन पे पैरहन वबाल है

  - Naeem Sarmad

ये पैरहन पे पैरहन वबाल है
सो ख़ुद को बे-वबाल कर विसाल कर

वजूद-ए-जिस्म-ओ-जाँ से इस्तिफ़ादा कर
ज़रा समय निकाल कर विसाल कर

लहू को चुल्लुओं में ले के यूँँ उड़ा
बदन पे रंग डाल कर विसाल कर

अमीर-ए-वहशियान-ए-इश्क़ हूँ सो तू
ज़रा सी देख-भाल कर विसाल कर

ये इस्म-ए-कारसाज़ है जुनून पढ़
ये होश पाएमाल कर विसाल कर

तिरी ये ज़र्द आँखें देख शर्म कर
तू इन का रंग लाल कर विसाल कर

ख़ुदा जवाब दे न दे बिगड़ पड़े
ख़ुदास भी सवाल कर विसाल कर

विसाल-ए-यार गर हराम है तो सुन
हराम को हलाल कर विसाल कर

ख़ुदा का हिज्र अस्ल में विसाल है
सो इस में इंतिक़ाल कर विसाल कर

फ़िराक़ से गुरेज़ कर गुरेज़ कर
विसाल कर विसाल कर विसाल कर

  - Naeem Sarmad

Haya Shayari

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