लबों से मेरे गर तेरे लब मिले
सुकूँ ज़िंदगी और ख़ुशी सब मिले
तुझे भर नज़र देखने दे मुझे
मेरे दिल को राहत कहीं तब मिले
हमें बोसा इक चाहिए जान-ए-जाँ
मिले कह दिया हम ने मतलब मिले
हमीं को न पहचान पाए हमीं
हो कर दूर हम ख़ुद से फिर जब मिले
अभी तक हो नाराज़ क्या कुछ कहो
ये नाराज़गी छोड़ हम अब मिले
कभी इस तरह मुझ से मिलने को आ
वही जिस तरह शाम से शब मिले
— Chandan Sharma















