गरचे मैं अपनी दिल की दुनिया आबाद नहीं रख सकता
पर भुला कर मैं तुम्हें दिल को नाशाद नहीं रख सकता
मेरा दिल एक परिंदा है ऐसा एक परिंदा जिसको
कर के क़ैद कहीं भी कोई भी सय्याद नहीं रख सकता
तेरी यादों में रहते हुए एक ज़माना बीत गया
तेरा कहना तो था कि मैं तुझे याद नहीं रख सकता
खूब तबाह ग़म-ओ-दर्द-ए-जुदाई ने कर लिया मुझे
अब मैं किसी भी ग़म में ख़ुद को बर्बाद नहीं रख सकता
मैंने मुहब्बत में इक रोज़ बदल दिया ख़ुदा अपना
रस्मन ख़ुदा के दर फुरक़त में फर्याद नहीं रख सकता
तुम्हारी यादों की नेमत है मेरे सुख़न की बरकत
मैं ख़ुद को तुम्हारी यादों से आज़ाद नहीं रख सकता
मैंने महफ़िल में रख दी है हँस कर जो बातें लिख रक्खो
ये बातें कोई सुख़नवर मेरे बाद नहीं रख सकता
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