
दरमियाँ नफ़रत के घुट घुट कर मुहब्बत मर रही है
ख़ून होता है हया का और शराफ़त मर रही है
ये सियासत है कि दंगों से इन्हें कुर्सी मिली है
इस सियासी खेल में यारों ख़जालत मर रही है
— Chandan Sharma
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