मैं उसे जाने न देता कभी आसानी से
मैं मुहब्बत में भी हारा हुँ बईमानी से
सादा' दिल हूँ जो बहुत सादगी पसंद मुझे
मुझ को मतलब ही नहीं गूची से अरमानी से
तू मेरे साथ तो दुनिया की ख़ुशी है मेरे साथ
लेना देना ही नहीं दुनिया की वीरानी से
कभी अच्छे तो कभी बद से बुरे दिन मेरे
आज फ़ाक़ा है तो कल नाशता बिरयानी से
ज़िस्म की चाह को ये 'इश्क़ कहा करते हैं
इन को मतलब है तो बस ज़िस्म की उरयानी से
वो मुहब्बत से नहीं वक़्त से हारा हुआ है
कहीं मिल जाय तो कह देना मेरी रानी से
मैं कभी कह नहीं पाया जो उसे सुनना था
वो भी डरती रही इक रिश्ते की कुर्बानी से
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