क़ल्ब-ए-हज़ी मता-ए-जाँ यूँँ शाद कीजिएकसरत के साथ आप हमें याद कीजिएदौलत में चाहते हो इज़ाफा अगर शजरतो बेकसों यतीमों की इमदाद कीजिए— Shajar Abbas