Meaning of

क़दर

qadar • قدر

मूल्य; क़ीमत; सराहना

value; worth; appreciation

قدر; قیمت; تعریف

Arabic

तुम अपने बारे में कुछ देर सोचना छोड़ो
तो मैं बताऊँ कि तुम किस क़दर अकेले हो

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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त
मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त

ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं
किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त

157

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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए
इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं

तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया
इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं

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मिलने की तरह मुझ सेे वो पल भर नहीं मिलता
दिल उस से मिला जिस सेे मुक़द्दर नहीं मिलता

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वो आए घर में हमारे ख़ुदा की क़ुदरत है
कभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं

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छू लेने दो नाज़ुक होंठों को, कुछ और नहीं हैं जाम हैं ये
क़ुदरत ने जो हम को बख़्शा है, वो सब सेे हसीं ईनाम हैं ये

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किस क़दर सह
में हुए हैं टूटने के डर से ये
आप इन कच्चे घड़ों पर हाथ रख कर देखिए

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कोशिश भी कर उमीद भी रख रास्ता भी चुन
फिर इस के ब'अद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर

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किसी से कोई भी उम्मीद रखना छोड़ कर देखो
तो ये रिश्ते निभाना किस क़दर आसान हो जाए

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फिर एक रोज़ मुक़द्दर से हार मानी गई
ज़बीन चूम के बोला गया "ख़ुदा हाफ़िज़"

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तुम अपने बारे में कुछ देर सोचना छोड़ो
तो मैं बताऊँ कि तुम किस क़दर अकेले हो

58

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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त
मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त

ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं
किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त

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मूल रूप से, 'क़दर' किसी चीज़ के आंतरिक मूल्य या क़ीमत को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर अमूर्त गुणों जैसे प्रेम या सुंदरता की सराहना और उनकी क्षणभंगुर प्रकृति की पहचान को दर्शाता है।

कवि 'क़दर' का उपयोग क्षणों और भावनाओं की अनमोलता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो उन चीज़ों की सराहना के महत्व को रेखांकित करता है जिन्हें अक्सर अनदेखा या हल्के में लिया जाता है।

कविता के क्षेत्र में, 'क़दर' हमें जीवन के क्षणभंगुर खजानों को संजोने की याद दिलाता है।