झूठ जुमला है कि मर्दों को नहीं होता है दर्दहर बशर की रूह को ग़म सालता तो ख़ूब हैदोस्ती कर ली हो जिसने रंज-ओ-ग़म की शाम सेदर्द ही दुश्मन है उसका दर्द ही महबूब है— Nityanand Vajpayee