Meaning of

बशर

bashar • بشر

मानव; नश्वर

human; mortal

انسان; فانی

Arabic

समझ से काम जो लेता हर एक बशर 'ताबाँ' न हाहा-कार ही मचते न घर जला करते — Anwar Taban
आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं सामान सौ बरस का है पल की ख़बर नहीं — Hairat Allahabadi
अगर मंज़िल न मिल पाए तो भी क्या 'बशर' ये रास्ता तो दिल-नशीं है — Dharmesh bashar
ढूँढ़ ही लेते हैं हर हाल शिकार अपना 'बशर' कुछ परिंदों की बड़ी तेज़ नज़र होती है — Dharmesh bashar
ख़ुदा, फ़रिश्ते, पयम्बर, बशर किसी का नहीं मुझे लिहाज़ तो सबका है डर किसी का नहीं — Charagh Sharma
सभी को आता है कोई न कोई काम 'बशर' हर एक शख़्स मगर काम का नहीं होता — Dharmesh bashar
तितलियाँ ख़ून से तर यूँँ ही नहीं फिरती बशर काँटे फूलों की क़बा ओढ़ के खिलते हैं यहाँ — Dharmesh bashar
फ़लसफ़ी था वो कभी अब तो 'बशर' शाइ'र है इस के अश'आर में वो बात न ढूँढ़े कोई — Dharmesh bashar

'बशर' शब्द मानव होने के सार को दर्शाता है, जिसमें उसकी सभी कमजोरियाँ और ताकतें शामिल हैं। कविता में, यह अक्सर जीवन की क्षणभंगुरता को दर्शाता है, अस्तित्व और विस्मृति के बीच के नाजुक संतुलन को।

कवि 'बशर' का उपयोग मृत्यु और मानव स्थिति के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह हमारी साझा नाजुकता और हमारी अस्थिरता में पाई जाने वाली सुंदरता की याद दिलाता है।

'बशर' अपनी सरलता में हमारे अस्तित्व की गहरी सच्चाई को पकड़ता है। यह एक ऐसा शब्द है जो दिल की शांत प्रतिबिंबों के साथ गूंजता है।