Meaning of

बशर

bashar • بشر

मानव; नश्वर

human; mortal

انسان; فانی

Arabic

गरचे ख़ुदा-नुमा है कोई तो 'बशर' ही है
बज़्म-ए-बुताँ में एक ही फ़नकार है 'बशर'

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ऐसे हालात से मजबूर बशर देखे हैं
अस्ल क्या सूद में बिकते हुए घर देखे हैं

हम ने देखा है वज़ादार घरानों का जवाल
हम ने सड़कों पे कई शाह ज़फ़र देखे है

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ख़ुदा, फ़रिश्ते, पयम्बर, बशर किसी का नहीं
मुझे लिहाज़ तो सबका है डर किसी का नहीं

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समझ से काम जो लेता हर एक बशर 'ताबाँ'
न हाहा-कार ही मचते न घर जला करते

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आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं
सामान सौ बरस का है पल की ख़बर नहीं

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सभी को आता है कोई न कोई काम 'बशर'
हर एक शख़्स मगर काम का नहीं होता

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मिरे दिल में पड़ा चुप-चाप बच्चा
यकायक आज रोना चाहता है

ये दुनिया के झमेलों को यहीं पर
बशर हर छोड़ जाना चाहता है

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अगर मंज़िल न मिल पाए तो भी क्या
'बशर' ये रास्ता तो दिल-नशीं है

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तितलियाँ ख़ून से तर यूँँ ही नहीं फिरती बशर
काँटे फूलों की क़बा ओढ़ के खिलते हैं यहाँ

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ढूँढ़ ही लेते हैं हर हाल शिकार अपना 'बशर'
कुछ परिंदों की बड़ी तेज़ नज़र होती है

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गरचे ख़ुदा-नुमा है कोई तो 'बशर' ही है
बज़्म-ए-बुताँ में एक ही फ़नकार है 'बशर'

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ऐसे हालात से मजबूर बशर देखे हैं
अस्ल क्या सूद में बिकते हुए घर देखे हैं

हम ने देखा है वज़ादार घरानों का जवाल
हम ने सड़कों पे कई शाह ज़फ़र देखे है

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'बशर' शब्द मानव होने के सार को दर्शाता है, जिसमें उसकी सभी कमजोरियाँ और ताकतें शामिल हैं। कविता में, यह अक्सर जीवन की क्षणभंगुरता को दर्शाता है, अस्तित्व और विस्मृति के बीच के नाजुक संतुलन को।

कवि 'बशर' का उपयोग मृत्यु और मानव स्थिति के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह हमारी साझा नाजुकता और हमारी अस्थिरता में पाई जाने वाली सुंदरता की याद दिलाता है।

'बशर' अपनी सरलता में हमारे अस्तित्व की गहरी सच्चाई को पकड़ता है। यह एक ऐसा शब्द है जो दिल की शांत प्रतिबिंबों के साथ गूंजता है।