रख ही दिए हैं मैंने वो ग़म बाद के लिए
वक़्त अब तो वैसे भी नहीं फ़रियाद के लिए
इस दिल के साथ जल गई तस्वीर भी तिरी
अब और कुछ नहीं है तेरी याद के लिए
ये 'इश्क़ हम पे रहम नहीं खाने वाला है
हम मुजरिमों के जैसे है जल्लाद के लिए
बस एक शख़्स पे ज़र-ओ-दौलत लुटा दिया
मैं कुछ बचा नहीं सका औलाद के लिए
मैं घर का पहला शख़्स हूँ जो 'इश्क़ में मरा
ये कितना शर्मनाक है अज्दाद के लिए
रोटी कमाने के लिए वो तोड़ता है जिस्म
ये दुनिया नर्क हो गई शहज़ाद के लिए
तू आशियाने तक उसे ले आई फ़ाख़्ता
अब खोल दे किवाड़ भी सय्याद के लिए
उसके हवाले कर ही दिया वक़्त आने पर
बेटी को पालना पड़ा दामाद के लिए
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