होगा दुख कल उसे मंज़र के बदल जाने सेआज जो ख़ुश है दिसंबर के बदल जाने सेरोज़-ओ-शब रोते हैं हम कल भी हमें रोना हैहम को क्या फ़र्क कैलेंडर के बदल जाने से— Bhuwan Singh