हम को चढ़ा है शौक़ उसी एक क़िस्म काकरने लगे हैं अब तो नशा हम भी जिस्म काअब हम भी आने लग गए हैं उस के काबू मेंऐसा मतीन जाल है उस के तिलिस्म का— Bhuwan Singh