rakh hi diye hain maine vo gham baad ke li.e | रख ही दिए हैं मैंने वो ग़म बाद के लिए

  - Bhuwan Singh

रख ही दिए हैं मैंने वो ग़म बाद के लिए
वक़्त अब तो वैसे भी नहीं फ़रियाद के लिए

इस दिल के साथ जल गई तस्वीर भी तिरी
अब और कुछ नहीं है तेरी याद के लिए

ये 'इश्क़ हम पे रहम नहीं खाने वाला है
हम मुजरिमों के जैसे है जल्लाद के लिए

बस एक शख़्स पे ज़र-ओ-दौलत लुटा दिया
मैं कुछ बचा नहीं सका औलाद के लिए

मैं घर का पहला शख़्स हूँ जो 'इश्क़ में मरा
ये कितना शर्मनाक है अज्दाद के लिए

रोटी कमाने के लिए वो तोड़ता है जिस्म
ये दुनिया नर्क हो गई शहज़ाद के लिए

तू आशियाने तक उसे ले आई फ़ाख़्ता
अब खोल दे किवाड़ भी सय्याद के लिए

उसके हवाले कर ही दिया वक़्त आने पर
बेटी को पालना पड़ा दामाद के लिए

  - Bhuwan Singh

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