isi khayal ke chalte to iztiraar men hooñ | इसी ख़याल के चलते तो इज़्तिरार में हूँ

  - Bhuwan Singh

इसी ख़याल के चलते तो इज़्तिरार में हूँ
मैं तेरे होते हुए क्यूँ किसी के प्यार में हूँ

ये लाज़मी है कि मुझ पे तेरी नज़र न पड़े
मैं तेरे आशिक़ों की आख़िरी क़तार में हूँ

थी जिस मकान की बुनियाद बे-वफ़ाई तेरी
मैं उस मकान की दीवार की दरार में हूँ

समझना मैं हूँ अगर ये ज़मीं धड़कती दिखे
कि तेरे पाँव तले दफ़्न इक मज़ार में हूँ

अगरचे मौत की हसरत में ज़िंदा हूँ लेकिन
तू ये समझना कि मैं तेरे इंतिज़ार में हूँ

  - Bhuwan Singh

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