बारहा उस की गली और वो दर दिखता थापर जिसे देखना था एक नज़र दिखता थाक्या करूँ अब कि खड़ी कर गया दीवार रक़ीबवरना घर से मेरे महबूब का घर दिखता था— Bhuwan Singh