यही लगा था कि क़िस्मत सँवरने वाली थी

हाँ जब वो ख़ुद को मेरे नाम करने वाली थी

किसी ने मुझ से भी वादे किए थे जन्मों के
थी इक जो साथ मेरे जीने मरने वाली थी

मैं था जो रिश्ते में इक हद में रहने वाला था
वो बे-वफ़ा थी तो हद से गुज़रने वाली थी

ये हिज्र उस के ही चेहरे से ले गया है नूर
बिछड़ के मुझ से जो लड़की निखरने वाली थी

— Bhuwan Singh

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