na koii rishta na hi dosti banaya tha | न कोई रिश्ता न ही दोस्ती बनाया था

  - Bhuwan Singh

न कोई रिश्ता न ही दोस्ती बनाया था
हमें नसीब ने बस अजनबी बनाया था

वो मेरी पहली मोहब्बत थी और फिर मैंने
उसी के बाद उसी को आख़िरी बनाया था

अभी समझ नहीं है तुझको 'इश्क़ की जानाँ
बनाने वाले ने तुझको गधी बनाया था

चला गया है तू तो टूटने लगा हूॅं देख
इस एक पुतले को तूने कभी बनाया था

इस इक महीने में ज़्यादा भरा हुआ है ग़म
तभी तो कम दिनों का फ़रवरी बनाया था

किसी भी काम में अब मेरा मन नहीं लगता
मैं सच कहूॅं तो मुझे आलसी बनाया था

बड़े ही वक़्त के बाद अपने घर गया था मैं
सो माँ ने खाना भी फ़रमाइशी बनाया था

वो जानता था किसे दर्द से नवाज़ना है
ख़ुदा ने सोच के ही आदमी बनाया था

वो चल बसा तो बस इतना ही याद रखना तुम
'भुवन' था जिसने तुम्हें ज़िंदगी बनाया था

  - Bhuwan Singh

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