दीवार उठाने की तिजारत नहीं आईदिल्ली में रहे और सियासत नहीं आईबिकने को तो दिल बिक गया बाज़ार में लेकिनजो आप बताते थे वो क़ीमत नहीं आई— Obaid Azam Azmi