मुक़ाबिल फ़ासलों से ही मोहब्बत डूब जाएगीसुनोगी झूठी बातें तुम हक़ीक़त डूब जाएगीचलेगी तब तलक जब तक तिरी परछाईं देखेगीतिरा जब हुस्न देखेगी सियासत डूब जाएगी— Anurag Pandey