Dharamraj deshraj

Dharamraj deshraj

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Dharamraj deshraj shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Dharamraj deshraj's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

लोग भूलेंगे मुहब्बत जिस दिन बस उसी रोज़ क़यामत होगी — Dharamraj deshraj
वक़्त के बन ग़ुलाम हम सारे नक़्शे-पा अपने छोड़ जाते हैं — Dharamraj deshraj
रेत को मुट्ठी में भर कर तय करें मीलों सफ़र इस तरह ख़ुशियाँ पहुँचती हैँ यहाँ आवाम तक — Dharamraj deshraj
जो दुखाते हैं दिल गरीबों का वो ग़ुनाहे-अज़ीम करते हैं — Dharamraj deshraj
बे-वफ़ा ज़ीस्त बुलबुला निकली कट गई उम्र आँख मलते ही — Dharamraj deshraj
कभी भूल कर भी न मुफ़लिस बताना मिला है हमें आँसुओं का ख़ज़ाना — Dharamraj deshraj
किस ने दिया है दर्द हमें कुछ पता नहीं इतना पता है दर्द हमारा है हिचकियाँ — Dharamraj deshraj
जिस के सीने में मुहब्बत का ख़ज़ाना होगा ऐसे इंसान की ठोकर में ज़माना होगा। — Dharamraj deshraj
कैसे साबित करोगे तुम ख़ुश हो मुस्कुराना ख़ुशी नहीं होती — Dharamraj deshraj
ज़िन्दगी का नहीं था जब मक़सद मौत का इंतिज़ार था मुझ को — Dharamraj deshraj
वो तेरा नींद में हँसना भी इक क़यामत है कभी तो ख़्वाब में हम को भी तू बुलाया कर — Dharamraj deshraj
मेरा मासूम बचपन था भूखा बहुत लोरियां माँ सुनाती रही रात भर — Dharamraj deshraj
ख़ुदा के वास्ते बस ये मुक़द्दस काम हो जाए जो उन के ग़म की दौलत है वो मेरे नाम ही जाए — Dharamraj deshraj
हम ने सलाम अर्ज़ कहा अपने यार से वो राम-राम कहके गले से लिपट गया — Dharamraj deshraj
जो मुमकिन हो तो सीने में बसा लो ये दिल भी आशियाना चाहता है — Dharamraj deshraj
दोस्ती की अभी अभी उन सेे ज़ख़्म हम को अभी से मिलते हैं — Dharamraj deshraj
दर्द सीने में पालकर रखना शर्त पहली है शा'इरी के लिए — Dharamraj deshraj
कर के बुलन्द हौसला निकले जो घर से हम काँटों ने छोड़ा रास्ता गुज़रे जिधर से हम — Dharamraj deshraj

Ghazal

इतना भी वक़्त हम को कज़ा ने नहीं दिया नाकामियों का जश्न मनाने नहीं दिया हम को यक़ीन अपने बुज़ुर्गो पे है बहुत चौखट पे सर कहीं भी झुकाने नहीं दिया मंज़िल की जुस्तजू में परीशाँ थे यार हम कितना सफ़र था सख़्त बताने नहीं दिया आँखों में अश्क भर के कहा उस ने अलविदा एहसान आँसुओं का उठाने नहीं दिया दिल ने कहा वतन के लिए जाँ लुटाने जा मौक़ा मिला तो हम ने भी जाने नहीं दिया। दिल में ही दफ़्न कर के रखे अपने दर्दो-ग़म अश्कों को बे-सबब ही लुटाने नहीं दिया बोसे तमाम चाँद के लेने नज़र से थे बदली ने छत पे चाँद को आने नहीं दिया — Dharamraj deshraj