Daagh Aligarhi

Daagh Aligarhi

@kumaran823919

kumar anupam shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in kumar anupam's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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  • Sher
  • Ghazal

सारी दुनिया से किनारा भी नहीं कर सकते
तेरी यादों पे गुज़ारा भी नहीं कर सकते

रू-ब-रू आज हुए भी तो हुए ऐसी जगह
हम कोई साफ़ इशारा भी नहीं कर सकते

Daagh Aligarhi

जिसकी इक तस्वीर ले आयी लहू इन आँखों में
वो मुक़ाबिल आएगा तो आँखें ही ले जाएगा

Daagh Aligarhi

ले हम भी सर उठाते हैं मुहब्बत
दिखा जो दाँव आते हैं मुहब्बत

अलिफ़ से मीम तक लाये थे जिनको
वो हम को ही सिखाते हैं मुहब्बत

Daagh Aligarhi

आप हैं दोस्त तो फिर आपसे दुश्मन बेहतर
राम को याद तो कर लेता था रावण अक्सर

आप मज़बूर थे बिकने को बिके मंदे में
हमनें बाजार की शर्तों को लगा दी ठोकर

Daagh Aligarhi

मिटते मिटते मिटती है हो अगर कसक कोई
ज़ख्म चाहे जैसा हो, भरते भरते भरता है

Daagh Aligarhi

दोस्त होकर भी है मेरा दुश्मन
उसका किरदार दो-मुहाँ सा है

Daagh Aligarhi

बस्ती बस्ती ख़ाक उड़ाये, बस वहशत का मारा हो
उससे इश्क़ की आस न करना जिसका मन बंजारा हो

ख़ुद को शाइर कहते रहना दिल को लाख सुकूँ दे दे
लेकिन दुनिया की नज़रों में तुम अब भी आवारा हो

Daagh Aligarhi
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इक शहनशाह ने बनवा के हँसी ताजमहल
हाथ कटवाए ग़रीबों के, हुनर छीन लिया

Daagh Aligarhi