Daagh Aligarhi

Daagh Aligarhi

@kumaran823919

kumar anupam shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in kumar anupam's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

मिटते मिटते मिटती है हो अगर कसक कोई ज़ख़्म चाहे जैसा हो, भरते भरते भरता है — Daagh Aligarhi
जिस की इक तस्वीर ले आई लहू इन आँखों में वो मुक़ाबिल आएगा तो आँखें ही ले जाएगा — Daagh Aligarhi
दोस्त होकर भी है मेरा दुश्मन उस का किरदार दो-मुहाँ सा है — Daagh Aligarhi
इक शहनशाह ने बनवा के हँसी ताजमहल हाथ कटवाए ग़रीबों के, हुनर छीन लिया — Daagh Aligarhi

Ghazal

बस्ती बस्ती ख़ाक उड़ाये, बस वहशत का मारा हो उस सेे इश्क़ की आस न करना जिस का मन बंजारा हो सारे तारों की निय्यत में एक ही पहलू ठहरा है चाहे क़ीमत कोई भी हो, लेकिन चाँद हमारा हो क़तरा क़तरा रोना भी क्या हिज्र के मौसम का रोना? चश्म-ए-तर मम्बा हो जाए मू-ए-मिज़ा फव्वारा हो बचपन की भी ख़्वाहिश देखो तकते रहते थे अंबर? ख़्वाबों की हसरत थी सैर को परियों का सय्यारा हो इतना कह कर छोड़ आया मैं उस के कूचे को परसों जा मेरा दिल तोड़ने वाले, तुझ को इश्क़ दुबारा हो यार सियासी तलवारों को पीना है हर रोज़ लहू चाहे लाश प लाश बिछें या ख़ूँ से तर गहवारा हो ख़ुद को शाइ'र कहते रहना दिल को लाख सुकूँ दे दे लेकिन दुनिया की नज़रों में तुम अब भी आवारा हो — Daagh Aligarhi