बस्ती बस्ती ख़ाक उड़ाये, बस वहशत का मारा हो
उससे 'इश्क़ की आस न करना जिसका मन बंजारा हो
ख़ुद को शाइर कहते रहना दिल को लाख सुकूँ दे दे
लेकिन दुनिया की नज़रों में तुम अब भी आवारा हो
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