
आप हैं दोस्त तो फिर आपसे दुश्मन बेहतर
राम को याद तो कर लेता था रावण अक्सर
आप मज़बूर थे बिकने को बिके मंदे में
हमनें बाजार की शर्तों को लगा दी ठोकर
— Daagh Aligarhi
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