नादान तमन्नाओं की ख़्वाहिश में मरेंगे

जज़्बात के ये पंछी भी लग़्ज़िश में मरेंगे

बेहतर है ज़माने से छुपाए हुए रखना
हम लोग मुहब्बत की नुमाइश में मरेंगे

ख़ामोश रहें तब भी हलाक़त की हैं ज़द में
बोले जो सितम
गर की सताइश में, मरेंगे

दुश्मन के तो ख़ेमे से निकल आए हैं ज़िंदा
है दोस्त ये तय तेरी नवाज़िश में मरेंगे

मरने की दुआ की तो हमें मौत न आई
लगता है कि जीने की ही कोशिश में मरेंगे

इस दौर ए जिहालत में सभी अच्छे सुख़नवर
इक रोज़ हुनर तेरी सिफ़ारिश में मरेंगे

— Daagh Aligarhi

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Ilm Shayari

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