जरा ठहरो की शब फीकी बहुत है - Zubair Ali Tabish

जरा ठहरो की शब फीकी बहुत है
तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है

जरा नजदीक आकर बैठ जाओ
तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है

Zubair Ali Tabish
57

Share this on social media

Today's Festival

National Doctors' Day

July 1, 2022

आँधियों से लड़ रहे हैं जंग कुछ काग़ज़ के लोग
हम पे लाज़िम है कि इन लोगों को फ़ौलादी कहें

  • 15 Sher
Read all

Love Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Zubair Ali Tabish

As you were reading Shayari by Zubair Ali Tabish

Similar Writers

our suggestion based on Zubair Ali Tabish

Similar Moods

As you were reading Love Shayari