YAAR

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YAAR shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in YAAR's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

शायरा परवीन जैसी मैं मुहब्बत देख भी लूँ यार सरवत ट्रेन से कटती जवानी हो न जाए — YAAR

Ghazal

हाए ज़ालिम और फ़र्ज़ी सी ख़ुमारी हो न जाए जो बची नफ़रत दिलों में है पुरानी हो न जाए भुखमरी में बद्दुआओं से मुझे डर लग रहा है जो फ़क़ीरों ने कहा था वो कहानी हो न जाए गर बदन की अचकनें कम हो रही हैं तो लगेगा ज़िंदगी भर के लिए वो अब तुम्हारी हो न जाए आप से ये दोस्ती तो बच नहीं पाई कहूँ क्या अब कहीं ये दुश्मनी भी ख़ानदानी हो न जाए शहर में वो सिर्फ़ अरमानों तले आया हुआ है बोझ ज़िम्मेदार है जिस का सवाली हो न जाए पान खाती लड़कियाँ जो दूर से तुम देखते हो ये तुम्हारी आँख जो है ज़ा'फ़रानी हो न जाए ग़ौर से मत देख उस को वो तुझे भैया कहेगी छोड़ जाने दे कहीं वो बद-गुमानी हो न जाए शायरा परवीन जैसी मैं मुहब्बत देख भी लूँ यार सरवत ट्रेन वाली ज़िंदगानी हो न जाए — YAAR
तेरा यहाँ होना कि कोई भी यहाँ रहता नहीं कुछ भी हुई हो दास्ताँ ये दिल कभी सहमा नहीं ऐसा नहीं कुछ चाहिए था उस फ़रेबी से मुझे उम्मीद थी मुझ को समझ लेगा मगर समझा नहीं वो आरसी में देख के ख़ुद को बनाती हो मगर तेरा उसे नज़रें मिला के देखना अच्छा नहीं इन सिसकियों ने आह को रोका हुआ है आज भी तू देख मेरी आँख से दरिया कभी बहता नहीं कब तक रहूँ तेरी गली में तू दरीचा खोल दे दीदार जब होता नहीं मुझ को सुकूँ रहता नहीं इक मर्तबा तुम देख लो सब कुछ यहाँ मौजूद है तुम कह रहे थे बारहा पर कुछ यहाँ मिलता नहीं वो तो जुदा हो के गया था फिर भला क्यूँ आ गया ये ज़ुल्म उस का फिर सताएगा मुझे अच्छा नहीं — YAAR
तमाशा है ग़ज़ल मेरी उसे इज़हार मत समझो सुनाता हूँ यहाँ जो भी उसे किरदार मत समझो किसी के ख़ूब-सूरत बोल को तुम प्यार मत समझो मिला है बात करने को उसे तुम यार मत समझो तुम्हें हर फ़लसफ़ा उस की नज़र से मिल गया होगा अगर वो आँख भर के देख ले अख़बार मत समझो बहुत थक सा गया हूँ ज़िंदगी आराम करने दो उदासी शख़्सियत में है मुझे बीमार मत समझो तुम्हारे सामने पर्दा करे या हुस्न दिख जाए निशाँ गुज़रे मगर तुम जिस्म का हक़दार मत समझो मुदावा आप के हर ज़ख़्म हर तकलीफ़ का होगा कभी अपने ख़ुदा को बे-ख़बर बेज़ार मत समझो सहर तक मैं यहीं ज़िंदा रहूँगा तुम चली आना यहाँ मरना तुम्हारे हाथ से बेकार मत समझो सभी का एक दिन मर कर चले जाना मुयस्सर है कभी इन मक़्तलों को फूल से गुलज़ार मत समझो कहोगी क्या रहे नाकाम हम वा'दा निभाने में तुम्हें मालूम है सब कुछ हमें मक्कार मत समझो भटकता हूँ बनारस की गली बाज़ार में दर दर यहाँ पे हर किसी को तुम निगाह-ए-यार मत समझो — YAAR