isi dar se isi deewaar se aage nahin badhta | इसी दर से इसी दीवार से आगे नहीं बढ़ता

  - Zeeshan Mehdi

इसी दर से इसी दीवार से आगे नहीं बढ़ता
ये कैसा प्यार है जो प्यार से आगे नहीं बढ़ता

हमारी ख़्वाहिशें इज़हार की हद तक नहीं जातीं
हमारा हौसला दीदार से आगे नहीं बढ़ता

हमारी ज़िंदगी में एक सुस्ती सी मुसलसल है
हमारा ख़ून इस रफ़्तार से आगे नहीं बढ़ता

किसी के हाथ से पी कर किसी को भूल जाते हैं
हमारा दर्द इस मेआ'र से आगे नहीं बढ़ता

हमारी ज़िंदगी लोगों में रह कर भी अकेली है
हमारा रास्ता बाज़ार से आगे नहीं बढ़ता

अजब इक क़हत है उस आँख में तेरे हवाले से
छलक कर अश्क भी रुख़्सार से आगे नहीं बढ़ता

हमारी जुस्तुजू है हम तिरे इक़रार तक पहुँचे
हमारा ख़्वाब इक इंकार से आगे नहीं बढ़ता

हमारी सोच तेरी गर्द-ए-पा को छू नहीं सकती
हमारा ज़ेहन इस आज़ार से आगे नहीं बढ़ता

हमारी आरज़ू 'ज़ीशान' पूरी ही नहीं होती
हमारा मसअला अख़बार से आगे नहीं बढ़ता

  - Zeeshan Mehdi

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