Sukeshini Budhawne

Sukeshini Budhawne

@Sukeshini_Budhawne

Sukeshini 'Muntazir' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sukeshini 'Muntazir''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

न कोई गिला है, न तुम से ख़फ़ा है ग़मे-दिल की अब के न कोई दवा है — Sukeshini Budhawne

Ghazal

कहाँ भटक रहा है ख़ानदान को ले कर कहाँ तू जाएगा इस झूठी शान को ले कर जहान में जो भी होता है अच्छे के ख़ातिर ये राख होनी है, मत रो मकान को ले कर घरों में अब भी है अस्लाफ़ की निशानी कुछ सो बात छिड़ती है जब पान-दान को ले कर कोई चुरा न लें ख़ुशबू बदन से आहिस्ता ये रात जागी है इस ज़ा'फ़रान को ले कर ये वस्ल की कोई रुत है कि है जुदाई बस हो जाती तंग मैं इस मेहरबान को ले कर सुकूत-ए-क़ल्ब में गूँजी अज़ान हूँ मैं तो सवेरे फ़िक्र उठी है अज़ान को ले कर शिकस्तगी में भी क्या शान है मेरी वैसे करूँँगी क्या मैं ये उँची उड़ान को ले कर — Sukeshini Budhawne