
सिलसिला ये है कि अब वो भी ख़फ़ा रहने लगा
ख़्वाब रूठा मेरी आँखों से जुदा रहने लगा
मेरे एहसास की चाँदी की चमक मद्धम है
जब से आपे में मुहब्बत का ख़ुदा रहने लगा
— Moni Gopal Tapish
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