farishton se bhi achha main bura hone se pehle tha | फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था

  - Anwar Shaoor

फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था
वो मुझ से इंतिहाई ख़ुश ख़फ़ा होने से पहले था

  - Anwar Shaoor

Khushi Shayari

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    ये कह के दिल ने मिरे हौसले बढ़ाए हैं
    ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं
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    मैं वहाँ बैठ जाऊँ कोने में

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    अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
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    अभी ठहर के मेरा ख़ानदान बाक़ी है
    Siraj Faisal Khan
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    मिरी सुब्ह का यूँ भी इज़हार हो
    पियाला हो कॉफ़ी का अख़बार हो

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    तेरे सिवा भी कई रंग ख़ुश नज़र थे मगर
    जो तुझको देख चुका हो वो और क्या देखे
    Parveen Shakir
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    ये ख़ुश आँखें किसी दिन रो पड़ेंगी और
    किसी दिन मुस्कुराएंगी उदास आँखें
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    अच्छा ख़ासा बैठे बैठे गुम हो जाता हूँ
    अब मैं अक्सर मैं नहीं रहता तुम हो जाता हूँ
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    नहीं रहा मिरा साक़ी शराब किस से लूँ
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    मेरे घर के तमाम दरवाज़े
    तुम से करते हैं प्यार आ जाओ
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    हादसा इतना बड़ा हो जाएगा
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    इत्तिफ़ाक़ अपनी जगह ख़ुश-क़िस्मती अपनी जगह
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