Aatish Indori

Aatish Indori

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Aatish Indori shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Aatish Indori's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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  • Nazm

मोहब्बत ने मुझे औक़ात दिखला दी
ज़रूरी क्यूँ है धन ये बात सिखला दी

Aatish Indori

महज़ आशिक़ है दीवाने नहीं हैं वे जो मय-ख़ाने में बैठे हैं
जो दीवाने हैं वे माशूक़ की बाँहों में वीराने में बैठे हैं

Aatish Indori

उसकी चाहत की थाह देखूँगा
सबसे पहले निगाह देखूँगा

क्या मुझे सिर्फ़ तुम ही देखोगे
मैं भी होते तबाह देखूँगा

Aatish Indori

माना कि धागे पक्के हैं कच्चे नहीं
कॉलेज के रिश्ते मगर टिकते नहीं

ख़ूब-अच्छे से यह बात सुन ले हर कोई
हम मुफ़्त मिल सकते हैं पर सस्ते नहीं

Aatish Indori

फंदा-वंदा छोड़कर मैं दूजा सपना बुन रहा हूँ
ख़ुद-कुशी तुझको नहीं मैं ज़िंदगी को चुन रहा हूँ

जान-ए-जानाँ जा रहा हूँ मैं मोहब्बत के शिखर पर
आशिक़ी को छोड़कर मैं बंदगी को चुन रहा हूँ

Aatish Indori

एक बच्चे की तरह सच्चे थे
जब हमारे मकान कच्चे थे

Aatish Indori

जब से हम ज़िंदगी को समझने लगे
तब से हम ख़ुदकुशी को समझने लगे

बेवफ़ाई सनम आपने जब से की
तब से हम बंदगी को समझने लगे

Aatish Indori

मेरे ज़िंदा होने पर हैरान मत हो
एक वादे को निभाया जा रहा है

Aatish Indori

बिना नज़रों में आए की निगहबानी हमारी
बहुत भाई हमें जानाँ अदाकारी तुम्हारी

Aatish Indori

मेरी पहचान इतनी सी है बस
माँ की आँखों का लाड़ला हूँ मैं

Aatish Indori

क़ैस-ओ-लैला का ज़माना यूँ तो दीवाना है
पर मोहब्बत पे बड़ी सख़्ती है जुर्माना है

Aatish Indori

मन बदल देने की ताक़त किसी मंतर में नहीं
भूल जा तू उसे वो तेरे मुक़द्दर में नहीं

Aatish Indori

थोड़े-मोड़े थोड़ी हम तो बेहद अजीब थे
रस्ते तब बदले जब हम मंज़िल के क़रीब थे

किस पर मढ़ते दोष अपनी बर्बादी का 'आतिश'
दूजा कोई न था हम ख़ुद ही अपने रक़ीब थे

Aatish Indori

मेरी आँखों ने अब तक वीराने देखे हैं
मूमल जैसे दर्द भरे अफ़साने देखे हैं

Aatish Indori

यूँ नहीं है यहीं नहीं लगता
मेरा दिल अब कहीं नहीं लगता

Aatish Indori

बिन बताए तू ख़लाओं में समा जाएगा
ये न सोचा था तू चुपचाप चला जाएगा

Aatish Indori

जिससे कोई जान न पहचान साथ उसके क्यूँ आबाद हुआ जाए
इससे अच्छा है कि मुहब्बत कर ली जाए और बर्बाद हुआ जाए

Aatish Indori

तुमसे मैंने कुछ नहीं चाहा मुहब्बत के सिवा
सब मिला तुमसे मुझे शोना मुहब्बत के सिवा

Aatish Indori

ज़िंदगी तेरे लिए मौत से रहमत माँगूँ
इतनी अच्छी नहीं गुज़री है कि मोहलत माँगूँ

Aatish Indori

महीने के महीने पूरा ख़र्चा मिल रहा है
ग़मों की एफ़-डी पर ब्याज़ अच्छा मिल रहा है

Aatish Indori

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