@aatishindori
Aatish Indori shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Aatish Indori's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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महज़ आशिक़ है दीवाने नहीं हैं वे जो मय-ख़ाने में बैठे हैं
जो दीवाने हैं वे माशूक़ की बाँहों में वीराने में बैठे हैं
उसकी चाहत की थाह देखूँगा
सबसे पहले निगाह देखूँगा
क्या मुझे सिर्फ़ तुम ही देखोगे
मैं भी होते तबाह देखूँगा
माना कि धागे पक्के हैं कच्चे नहीं
कॉलेज के रिश्ते मगर टिकते नहीं
ख़ूब-अच्छे से यह बात सुन ले हर कोई
हम मुफ़्त मिल सकते हैं पर सस्ते नहीं
फंदा-वंदा छोड़कर मैं दूजा सपना बुन रहा हूँ
ख़ुद-कुशी तुझको नहीं मैं ज़िंदगी को चुन रहा हूँ
जान-ए-जानाँ जा रहा हूँ मैं मोहब्बत के शिखर पर
आशिक़ी को छोड़कर मैं बंदगी को चुन रहा हूँ
जब से हम ज़िंदगी को समझने लगे
तब से हम ख़ुदकुशी को समझने लगे
बेवफ़ाई सनम आपने जब से की
तब से हम बंदगी को समझने लगे
थोड़े-मोड़े थोड़ी हम तो बेहद अजीब थे
रस्ते तब बदले जब हम मंज़िल के क़रीब थे
किस पर मढ़ते दोष अपनी बर्बादी का 'आतिश'
दूजा कोई न था हम ख़ुद ही अपने रक़ीब थे
जिससे कोई जान न पहचान साथ उसके क्यूँ आबाद हुआ जाए
इससे अच्छा है कि मुहब्बत कर ली जाए और बर्बाद हुआ जाए
तुमसे मैंने कुछ नहीं चाहा मुहब्बत के सिवा
सब मिला तुमसे मुझे शोना मुहब्बत के सिवा