Aatish Indori

Aatish Indori

@aatishindori

Aatish Indori shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Aatish Indori's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher(109)
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Sher

मोहब्बत ने मुझे औक़ात दिखला दी ज़रूरी क्यूँँ है धन ये बात सिखला दी — Aatish Indori
बिना नज़रों में आए की निगहबानी हमारी बहुत भाई हमें जानाँ अदाकारी तुम्हारी — Aatish Indori
क़ैस-ओ-लैला का ज़माना यूँँ तो दीवाना है पर मोहब्बत पे बड़ी सख़्ती है जुर्माना है — Aatish Indori
यूँँ नहीं है यहीं नहीं लगता मेरा दिल अब कहीं नहीं लगता — Aatish Indori
जिस सेे कोई जान न पहचान साथ उस के क्यूँँ आबाद हुआ जाए इस सेे अच्छा है कि मुहब्बत कर ली जाए और बर्बाद हुआ जाए — Aatish Indori
ज़िंदगी तेरे लिए मौत से रहमत माँगूँ इतनी अच्छी नहीं गुज़री है कि मोहलत माँगूँ — Aatish Indori
महज़ आशिक़ है दीवाने नहीं हैं वे जो मय-ख़ाने में बैठे हैं जो दीवाने हैं वे माशूक़ की बाँहों में वीराने में बैठे हैं — Aatish Indori
एक बच्चे की तरह सच्चे थे जब हमारे मकान कच्चे थे — Aatish Indori
मेरे ज़िंदा होने पर हैरान मत हो एक वादे को निभाया जा रहा है — Aatish Indori
मेरी पहचान इतनी सी है बस माँ की आँखों का लाड़ला हूँ मैं — Aatish Indori
मन बदल देने की ताक़त किसी मंतर में नहीं भूल जा तू उसे वो तेरे मुक़द्दर में नहीं — Aatish Indori
मेरी आँखों ने अब तक वीराने देखे हैं मूमल जैसे दर्द भरे अफ़साने देखे हैं — Aatish Indori
बिन बताए तू ख़लाओं में समा जाएगा ये न सोचा था तू चुप-चाप चला जाएगा — Aatish Indori
तुम सेे मैं ने कुछ नहीं चाहा मुहब्बत के सिवा सब मिला तुम सेे मुझे शोना मुहब्बत के सिवा — Aatish Indori
महीने के महीने पूरा ख़र्चा मिल रहा है ग़मों की एफ़-डी पर ब्याज़ अच्छा मिल रहा है — Aatish Indori

Ghazal

Nazm

"दवात" मेरी चिट्ठियों में मुहब्बत की गहराई झलकने लगी थी क्योंकि मैं ने अपना ख़ून दवात में भर लिया था पर तुम्हें ये लग रहा था कि ऐसा में क्यूँँ कर रहा हूँ मैं ने बताया नहीं कि तुम ने जो बे-वफ़ाई की थी उस का मुझे पता चल गया था इस लिए मैं ने ज़ियादा मुहब्बत देना शुरू' कर दिया था तुम पर बे-वफ़ाई पर बे-वफ़ाई करते जा रहे थे मुझे ये समझ नहीं आ रहा था कि मुहब्बत किस तरह से और बढ़ाऊँ कि तुम पूरे मेरे हो जाओ मैं ने दवात में ख़ून के साथ अपने आँसू भी मिला लिए थे चिट्ठियाँ और गहरी होती जा रही थी तुम उस गहराई में उतरने से गुरेज़ कर रही थी ये ज़रूरी भी था वरना तुम डूब कर मर जाते तुम को पूरा अपना बनाना था ये सोच कर मैं उस हर दवात में घुल गया जिस सेे प्रेमी चिट्ठियाँ लिखते थे ताकि तुम इतनी सारी चिट्ठियाँ पढ़ोगी तो मेरी मुहब्बत को समझ सकोगी अब मुझे तुम्हारी चिट्ठी आती हैं तो ऐसा लगता है जैसे वो चिट्ठी मैं ने तुम्हें लिखी है — Aatish Indori