माना कि धागे पक्के हैं कच्चे नहीं

  - Aatish Indori

माना कि धागे पक्के हैं कच्चे नहीं
कॉलेज के रिश्ते मगर टिकते नहीं

ख़ूब-अच्छे से यह बात सुन ले हर कोई
हम मुफ़्त मिल सकते हैं पर सस्ते नहीं

  - Aatish Indori

More by Aatish Indori

As you were reading Shayari by Aatish Indori

Similar Writers

our suggestion based on Aatish Indori

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari