शहादत देने में आगे रहे हर वक़्त, मक्कारी नहीं की
मिला लालच बहुत लेकिन वतन के साथ ग़द्दारी नहीं की
मुकम्मल हो नहीं पाई मुहब्बत क्यूँँकि हुशियारी नहीं की
रक़ीबों की तरह पहले से मैंने कोई तैयारी नहीं की
अमीरों की तरह कोई भी हरक़त हमने बाज़ारी नहीं की
मशक़्क़त से मुहब्बत को कमाया है ख़रीदारी नहीं की
वफ़ादारी की लेकिन दूसरों की तरह अदाकारी नहीं की
इसी कारण से तुमको लगता है मैंने वफ़ादारी नहीं की
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