कभी मुझ सेे कोई शिकवा शिकायत ही नहीं करते
यूँँ लगता है कि तुम मुझ सेे मोहब्बत ही नहीं करते
हवाओं की तरह मुझको कहीं भी जाने देते हो
मोहब्बत हूँ तुम्हारी पर हिफ़ाज़त ही नहीं करते
बताओ भी मोहब्बत किस तरह अपनी मुकम्मल हो
मोहब्बत के लिए तुम तो बग़ावत ही नहीं करते
क़रीब आने की कोशिश आपने की ही नहीं जानाँ
तभी तो लगता है मुझको कि उल्फ़त ही नहीं करते
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