ख़फ़ा किस लिए हैं बताते नहीं हैंनज़र से नज़र भी मिलाते नहीं हैंख़बर उन की ला कर मुझे कोई दे देगली में मेरी क्यूँ वो आते नहीं हैं— Ashok Sagar