ये सहरा में किस ने ढकेला मुझे
बहुत चुभ रहा है उजाला मुझे
ये लगता है जा कर मिलेगी परी
तेरी ख़ुल्द में ही ख़ुदाया मुझे
बड़ी मुद्दतों से हूँ तन्हा कि अब
सताता है लोगों का मेला मुझे
रहे ख़ुश हमेशा न हो दर-ब-दर
जो यूँॅं कर गया है अकेला मुझे
मिला था न जब तक उसे और कोई
सो कुछ दिन तो उस ने सँभाला मुझे
मुहब्बत वुहब्बत न मुझ से करो
मुहब्बत लगे है झमेला मुझे
— 'June' Sahab Barelvi















