दुश्मनों के ही अब सहारे हैं
जंग अपनों से ऐसी हारे हैं
मेरे नज़दीक और कुछ भी नहीं
तू ही तू है तिरे नज़ारे हैं
अब तो वो दूर तक नहीं दिखते
वो जो कहते थे हम तुम्हारे हैं
ख़ैर से हो गया निकाह उन का
ख़ैर से हम भी अब कुँवारे हैं
तुम से मिलने की आस में जानाँ
हम ने गिन गिन के दिन गुज़ारे हैं
हम न बदले थे हम न बदलेंगे
हम तुम्हारे थे हम तुम्हारे हैं
— 'June' Sahab Barelvi















