Meaning of

जानाँ

jaanaan • جاناں

प्रिय; प्रियतम

beloved; darling

محبوب; پیارا

Persian

बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें
गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी

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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो
तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो

ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा
ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो

1283

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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए
तुम मेरी जान किस गुमान में हो

563

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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया
और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया

मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग
मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया

390

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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ
वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है

357

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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं
तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं

300

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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा
तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा

285

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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है
मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है

मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है
लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है

274

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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है
ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है

ये राह-ए-इश्क़ है इस
में क़दम ऐसे ही उठते हैं
मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है

221

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मेरे नाम से क्या मतलब है तुम्हें मिट जाएगा या रह जाता है
जब तुम ने ही साथ नहीं रहना फिर पीछे क्या रह जाता है

मेरे पास आने तक और किसी की याद उसे खा जाती है
वो मुझ तक कम ही पहुँचता है किसी और जगह रह जाता है

214

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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें
गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी

211

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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो
तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो

ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा
ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो

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'जानाँ' एक प्रिय को संबोधित करने का कोमल शब्द है, जो गर्मजोशी और स्नेह को जगाता है। कविता में यह गहरे प्रेम, आकांक्षा और प्रिय की प्रिय उपस्थिति को व्यक्त करने का माध्यम बन जाता है।

कवि अक्सर 'जानाँ' का उपयोग अपने स्नेह की गहराई को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह आदर्श प्रेमी, प्रेरणा का स्रोत, या वह अप्राप्य सुंदरता का प्रतीक हो सकता है जो हृदय को मोहित करती है।

काव्य क्षेत्र में, 'जानाँ' प्रेम की आकांक्षा का सार है, हृदय की गहरी इच्छाओं की एक कालातीत फुसफुसाहट।