कैफ़ियत ऐसी है कोई राज़दाँ मेरा नहीं
मैं अकेला हूँ यहाँ ये कारवाँ मेरा नहीं
सूरत-ए-अहवाल अपना हो बयाँ कैसे यहाँ
अस्ल में दिखता हूँ जो वो तर्जुमा मेरा नहीं
दिल मिरा क़दमों-तले रखती हो क्यूँँ तुम जान-ए-जाँ
दिल मिरा मासूम है दिल राएगाँ मेरा नहीं
ज़िक्र मेरा रात-दिन करते रहे जो कल तलक
अब लबों पर उन के भी नाम-ओ-निशाँ मेरा नहीं
तू बड़ा ख़ुश-बख़्त है उर्दू तिरी अहल-ए-ज़बान
बद-नसीबी देख ऐसा ख़ानदाँ मेरा नहीं
As you were reading Shayari by 'June' Sahab Barelvi
our suggestion based on 'June' Sahab Barelvi
As you were reading undefined Shayari