zaraa si baat ko dil se lagaaye baithe hain | ज़रा सी बात को दिल से लगाए बैठे हैं

  - 'June' Sahab Barelvi

ज़रा सी बात को दिल से लगाए बैठे हैं
मनाऊँ कैसे उन्हें तमतमाए बैठे हैं

कहा था फ़ोन पे घर आ के चाँद देखूँगा
झुका के सर को वो बिस्तर पे हाए बैठे हैं

मुझे गिला है मुहब्बत उन्हें नहीं मुझसे
उधर वो कब से यूँँ बत्ती बुझाए बैठे हैं

मिले थे मुझसे वो जब शायरी की महफ़िल में
तभी से दिल में वो मेरे समाए बैठे हैं

हमें ही थामना होगा अमन का अब परचम
ये नेता लोग तो हमको लड़ाए बैठे हैं

सिखा रहे हैं वो अब जू'न को वफ़ादारी
इधर उधर जो सभी को फँसाए बैठे हैं

  - 'June' Sahab Barelvi

Ghar Shayari

Our suggestion based on your choice

More by 'June' Sahab Barelvi

As you were reading Shayari by 'June' Sahab Barelvi

Similar Writers

our suggestion based on 'June' Sahab Barelvi

Similar Moods

As you were reading Ghar Shayari Shayari