है नहीं गर प्यार मुझको तो दिखावा क्यूँँ करूँँ
ये मुहब्बत है तमाशा मैं तमाशा क्यूँँ करूँँ
मैं ही क्यूँँ हर बार बोलूँ प्यार तो दोनों को है
तुझको मिलना है तो आ जा मैं तकाज़ा क्यूँँ करूँँ
माना तू सजनी है तो क्या मैं भी साजन हूँ तिरा
तू भी छुप कर मुझको देखे मैं ही देखा क्यूँँ करूँँ
देखा है लोगों को मैंने मिलते हैं फिर रोते हैं
फिर मैं तुझ सेे मिलने पर जिस्मों का सौदा क्यूँँ करूँँ
प्यार गर मैं हूँ तिरा तो प्यार है कोई मिरा
एक रिश्ता तोड़ के और एक रिश्ता क्यूँँ करूँँ
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